कोरोना महामारी का पर्यावरण और प्रकृति पर असर || LIVE IMAGE

 कोरोना महामारी का पर्यावरण और प्रकृति पर असर


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कोरोना महामारी  ने आज विकराल रूप धारण करके संपूर्ण विश्व को घरों में सिमट ने पर मजबूर कर दिया है |  लेकिन आज इसका दूसरा पहलू हमें यह याद रखने का संदेश दे रहा है कि, प्रकृति के लिए कोरोना  वरदान साबित हो रहा है | मनुष्य ने प्रकृति और संसाधनों का बेहद शोषण और दोहन किया है | लेकिन आज  लॉक डाउन के कारण प्रकृति में बेहद सकारात्मक बदलाव हो रहे हैं उदाहरणतया वायु शुद्ध हो गई है , नदियों का पानी स्वच्छ हो गया है , आसमान नीला हो गया है , जानवरों को उनका स्पेस मिल रहा है और पक्षियों की कलरव ध्वनि सुनाई दे रही है | मनुष्य आज जब घरों में कैद है तो जानवर वहां विचरण कर रहे हैं जो कभी उनकी जमीन थी | जानवर आजादी से घूम रहे हैं ऐसी वीडियो पूरे विश्व से सामने आ रही हैं |

ओडिशा के समुद्री तट पर इस बार लुप्त प्राय 7,90,000 ऑलिव रिडले कछुए अंडे देने के लिए पहुंचे | इन्होंने 6 करोड़ से ज्यादा अंडे दिए | लॉक डाउन से पहले यह तट मछुआरों और सैलानियों की भीड़ से खचाखच भरा रहता था, जो आज निर्जन है | विशेषज्ञों के अनुसार यह कछुए सामान्य परिस्थितियों में रास्ते में ही मर जाते या इन समुद्री तटों तक पहुंच ही नहीं पाते |

पड़ोसी देश नेपाल में चितवन नेशनल पार्क से निकलकर गैंडा सड़कों पर घूम रहा है | मुंबई में बहुत सी डॉल्फिन मरीन ड्राइव के तट पर आकर मस्ती कर रही हैं | दिल्ली में उल्लू , मोर, ग्रीन पिजन  जैसी कई प्रजातियां दिल्ली के रिहायशी इलाकों में दिखाई दे रही हैं |

उत्तराखंड और देहरादून की सड़कों पर घूमते भागते सांभर और हिरणों की वीडियो को आईपीएस श्री सुशांत नंदा ने ट्विटर पर शेयर किया है | नोएडा सेक्टर 38 ए में एक नीलगाय सड़कों पर घूमती दिखाई दी | आईपीएस श्री सुशांत नंदा ने केरल के कोच्चि कोट में घूमते   कस्तूरी बिलाव का वीडियो भी शेयर किया ,  जिसे आखिरी बार सन् 1990 में देखा गया था |कस्तूरी बिलाव की यह प्रजाति लुप्त होने के कगार पर है |

सिंगापुर के मरीना बे एरिया के चारों तरफ  ऊदबिलावो को खेलते देखा गया तो फ्रांस में भी वहेल मछली देखने को मिली | लॉक डाउन के चलते कुछ जानवरों को परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा है ,जैसे कुत्ते ,कबूतर ,बंदर इत्यादि जो आज खाने के लिए पूर्णतया मनुष्य पर आश्रित है | अतः कृपया इनका भी ध्यान रखें | अमेरिका के न्यूयॉर्क में प्रदूषण में 50% की कमी आई है |
दिल्ली की यमुना नदी का पानी बहुत स्वच्छ हो गया है और गंगा नदी का जल निर्मल होने लगा है | नदियों के पानी के पार नदी का तट स्पष्ट दिखाई दे रहा है यह बहुत ही आश्चर्यजनक है | एक तरफओजोन परत में सुधार के संकेत मिल रहे हैं |

पर्यावरण स्वच्छ हो गया है , हवा साफ हो गई है और आसमान नीला , पूरा नजारा ही बदल गया है | इसलिए हम कह सकते हैं कि  लॉक डाउन में मनुष्य को प्रकृति की वह तस्वीर दिखाई है जो वह शायद सपनों में ही तसव्वुर कर रहा था |     



- Rama Deepak
M.A. Hindi
M.A. Mass Communication




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