प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम Dr. Agni Shekhar का Open Letter || LIVE IMAGE


प्रिय प्रधानमंत्री श्रीमान् नरेंद्र मोदी जी,
  नमस्कार। 

■जम्मू-कश्मीर यूनियन टैरिटरी  के भविष्य से संबंधित परिसीमन, राज्य की बहाली सहित विकास के सम्भावित मुद्दों को लेकर 24 जून 2021 को  प्रस्तावित बहुदलीय बैठक से संबंधित कुछ  जरूरी बातें मैं आपके ध्यान में लाना चाहता हूँ।

■ आपने अप्रत्याशित रूप से इस प्रस्तावित बहुदलीय बैठक में   कश्मीर से उन सभी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं को बुलाया है जो भारत की एकता-अखंडता ( Unity & Integrity) और सम्प्रभुता( Sovereignty)के बरक्स कश्मीर की तथाकथित विशिष्ट संस्कृति, अनुच्छेद 370 और 35-ए के नाम पर अर्ध- अलगाववाद की राजनीति करती आई हैं।जैसे नेशनल कांफ्रेंस बृहद-स्वायत्तता/विशेष दर्जा/
मुस्लिम सब-नैशनलइज़्म
(Greater Autonomy/ Special Staust/Muslim Sub Nationalism), पीडीपी सेल्फ-रूल( Self Rule) विसैन्यीकरण(Demiliterization), संयुक्त नियंत्रण ( Joint Control) जैसा परवेज़ मुशर्रफ ऐजेंडा ( Pervez Mushraf Dotrine) आदि।

■ आप ने इन अर्ध- अलगाववादियों(Half separatists) को तो आमंत्रित किया,लेकिन लाखों निर्वासित कश्मीरी हिन्दुओं की प्रतिनिधि आवाज़ पनुन कश्मीर ( Panun Kashmir) की आश्चर्यजनक ढंग से अनदेखी की। 

■आपकी पूर्ववर्ती यूपीए सरकार ( UPA Govt) ने  हमें तीन -तीन गोलमेज़ कान्फ्रेंसेस ( Round Table Conferences) में बुलाकर हमारी राय को समादृत किया था, परिणाम चाहे कुछ न निकला हो। यही नहीं, पनुन कश्मीर के संयोजक के नाते मैं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी विजपेयी से पाँच बार शिष्टमंडल मंडल लेकर गया हूँ। 

■आप जानते होंगे कि चर्चित आगरा शिखर सम्मेलन (Agra Summit)  के अवसर पर लाखों निर्वासित कश्मीरी हिन्दुओं की ओर से प्रतिनिधित्व करने हेतु वाजपेयी जी ने पनुन कश्मीर के कन्वीनर ( Panun Kashmir Convenor) के नाते मुझे बाज़ाप्ता आमंत्रित किया था।और पाकिस्तान के राष्ट्राध्यक्ष जनरल परवेज़ मुशर्रफ के साथ मेरी मुठभेड तो अंतरराष्ट्रीय खबर बन गई थी।

■ और मुझे खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि विगत सात वर्ष में आप ने एकबार भी हमें भेंट करने का सुअवसर नहीं दिया।क्या संदेश दिया आपने हमें ? यही न कि हम लोगों की कोई औकात नहीं आपकी नज़रों में ।

■ अर्थात् हमारा महत्व तभी तक था आपकी पार्टी के लिए जब तक हमारे नाम पर भारतीय जनता पार्टी  वोटों की दृष्टि से लाभान्वित होती रही।

■ हमें इस बहुदलीय बैठक में न बुलाकर कश्मीर की मुस्लिम साम्प्रदायिकता की अलगाववादी राजनीति करने वाली ताकतों को वर्तमान केंद्र सरकार ने क्या संदेश दिया है , वो जगज़ाहिर है।

■लेकिन आपने कश्मीर में भारतीय सभ्यतागत  संस्कृति और हज़ारों वर्ष की निरन्तरता को मटियामेट करने वालों के साथ समझौता नहीं करने वाले लाखों कश्मीरी हिन्दुओं को क्या हिकारत भरा संदेश दिया वो हमारे लिए ही नहीं, पूरे देशवासियों के लिए भी साफ है।

■क्या आपने ऐसा करके हमें यह संदेश नहीं दिया कि कश्मीर एक 'मुस्लिम अधिकार क्षेत्र' है;  अर्थात् हमें अंततः आप उन्हीं को सौंपने जा रहे हैं जिनके हाथ हमारे जीनोसाइड(Genocide)
 से रंगे हैं ;जो हमारी सामूहिक जलावतनी( Mass Exodus) के ज़िम्मेदार हैं।

■ये वे ही राजनेता हैं जिन्हें कल तक आपकी पार्टी और संघ-परिवार के लोग अर्ध- अलगाववादी कहते नहीं थकते थे । इन पार्टियों के नवनिर्मित 'गुपकार गठबंधन' को क्या आपकी  सत्तारूढ भाजपा और गृहमंत्री श्री अमित शाह ने सोशल मीडिया (Social Media) पर गत वर्ष गुपकार गैंग ( Gupkar Gang)कहकर तन्ज़ कसा था।

 ■ आप यह ज़रूर कह सकते हैं कि आपने इसमें जम्मू से भी 5 राजनेताओं को न्यौता दिया है ; और उन 5 नेताओं में से भी 2 तो इन गुप्कार गंठबंधन के नेताओं के ही पिछलग्गू रहे हैं।
आपने देशभक्त डोगरा समाज की जेनुइन आवाज़( Genuine Voice ) 'इकजुट जम्मू' 
(Ikkjut Jammu) को भी अनदेखा और अनसुना कर दिया। जम्मू की देशभक्त जनता भी हमारी ही तरह आपके इस विवादित फैसले से आहत है।

■ मान्य महोदय, क्या आपने निर्वासित कश्मीरी हिन्दुओं को इग्नोर कर हमें गुपकार संगठन के नेताओं और उनकी राजनीतिक पार्टियों को ही भविष्य में सौंपने का सन्देश नहीं दिया ? इसका हम विरोध करते हैं और आगे भी प्राणपन से करेंगे।


■ हम जब कश्मीर घाटी में तमाम कश्मीरी हिन्दुओं के लिए अलग से एक होमलैंड पनुन कश्मीर(Homeland Panun Kashmir) बनाए जाने की मांग करते हैं तो हम दूसरे शब्दों में यह कह रहे हैं कि कश्मीर घाटी में अनुच्छेद 370 और 35-ए निरस्त किए जाने के डेढ वर्ष  बाद आज की तारीख में भी वहाँ न तो न इस देश का कोई भू- राजनीतिक और भू-सामरिक धरातल  ( Geo- political & Geo- Strategic  foothold) है और न ही हम वहाँ जाकर पुनः उखड़ने के लिए जाएंगे।क्योंकि यह हमारा 7वाँ बड़ा सामूहिक  निर्वासन है।

■ आप इस बात से शायद ही इंकार करेंगे कि यदि हम 1989-90 में कश्मीर के सैंकड़ों गाँवों में न्यूनतम इकाइयों की तरह छितरे- बिखरे रूप में नहीं रह रहे होते तो शायद हमारी  जलावतनी टल जाती।

■ हम इसीलिए कश्मीर घाटी में अब अंतिम रूप से सभी संवैधानिक अधिकारों की गारंटी के साथ एक ही क्षेत्र विशेष  में बसने के लिए 'पनुन कश्मीर' की माँग कर रहे हैं। सत्ता के कतिपय चाटुकारों को बात छोड़कर कोई भी स्वाभिमानी कश्मीरी हिन्दु  अब घाटी में ज़िलेवार अलग अलग जगहों में सदा निरीह, असुरक्षित और मुस्लिम बहुसंख्यक समाज की दया पर दोयम दर्जे के नागरिकों (2nd Class Citizens) की तरह जीवन क्यों जीने के लिए लौटना चाहेगा !

■इस दृष्टि से वहाँ तमाम जलावतन कश्मीरी हिन्दुओं को पनुन कश्मीर के ऐतिहासिक  'मार्गदर्शन प्रस्ताव' के अनुसार बसाया जाना अनिवार्यता है।और वह क्षेत्र एक यूटी घोषित किया जाए।

■ हमारी यह बसाहट फिलहाल वामन के पहले पग के रूप में भी आप ले सकते हैं , शेष दो पग उठाने के लिए पहला पग पनुन कश्मीर परम आवश्यक है।
हम कब इन्कार करते हैं कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर सहित सारा कश्मीर हमारा नहीं है।

■ हमारे लोग शुरु से आपकी सरकार से आशा करते रहे ( और वो आशा अभी भी टूटी नहीं है, दुर्बल ज़रूर हुई है ) कि यदि  मातृभूमि कश्मीर में हमारी वापसी और बसाहट हमारी भू-राजनीतिक जन-आकाँक्षाओं के अनुसार आपके दौर में हुई तो हो हुई ; अन्यथा बाद में कदापि नहीं होगी।

■देखा जाए तो तमाम कश्मीरी हिन्दु भी आपके अन्य करोडों जन- समर्थकों की तरह ''मोदी है तो मुमकिन है " में गहन विश्वास रखते हैं।इस दृष्टि से भी आपने तमाम कश्मीरी हिन्दुओं की आपके प्रति विश्वास की चूलें हिलाकर रख दी हैं।आप ऐसा कर सकते हैं उन्हें यकीन नहीं होता।

■ महोदय, लाखों निर्वासित कश्मीरी हिन्दु शरणार्थी  विगत इकतीस वर्ष से लगातार अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते आ रहे हैं।और हमारे जीनोसाइड  व आस्था के नाम पर  हमारा मूलोच्छेदन ( Genocide & religious cleansing)को आज तक किसी भी सरकार ने वैधानिक मान्यता नहीं दी।

■पनुन कश्मीर पुरज़ोर मांग करता है कि संसद में PANUN KASHMIR's GENOCIDE AND ATROCITIES PREVENTION BILL-2020 नामक हमारी ओर से आप को भेजी ऊपरोक्त 
जीनोसाइड बिल पारित कर कानूनी प्रावधान बनाया जाए ।

■यह आपका संवैधानिक दायित्व भी है।इससे जीनोसाइड  पलटने ( Riversal of Genocide) का पथ सुगम होगा। यही मूल मुद्दा रह गया है ।

■इससे विश्व बिरादरी की आँखें खुल जाएंगी कि कश्मीर में नब्बे के दशक में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों और जेहादियों ने जीनोसाइड जैसा कुकृत्य ( Worst act of Genocide) किया है।

■अन्यथा आप तो जानते ही हैं इस देश में दशकों से झूठ और दुष्प्रचार की जो सुनामी चलाई गई उसने हम जीनोसाइड के पीडितों( Victims of Genocide) को ही अपने गढे कुतर्को से दोषी
(Perpetrator) कहना चालू किया ; यहअभियान आज भी किसी न किसी रूप में जारी है।


■जीनोसाइड कानून बनने के बाद कश्मीर में हमारी मनोवांछित वापसी भी सम्भव होगी।

■अब आपने कश्मीर के उन्हीं नेताओं को अपनी प्रस्तावित बहुदलीय बैठक में बुलाकर इनकी पुनः साख बढ़ाई है जिसकी इनको भी अपेक्षा न थी। आप इन्हीं निर्जीव नेताओं को पुनर्जीवित करेंगे तो आपकी गाड़ी 'रिवर्स गियर' में कश्मीर के राजमार्ग से लुढ़क जाएगी।


■ ऐसा लगने लगा है कि आपके होते भाजपा की काया में जैसे काँग्रेस ने प्रवेश किया है।इसलिए आप भी इन अलगाव
-प्रिय मुस्लिम साम्प्रदायिकतावादियों का तुष्टिकरण करते दीख रहे हैं।

■यदि आपको लगता है कि आप भी पूर्ववर्ती काँग्रेस शासकों की तुष्टिकरण की नीति या पीडीपी तथा भाजपा गठबंधन की अनमेल-सरकार के दौरान मुफ्ती मुहम्मद सैयद की (जेहादी आतंकवादियों, उनके परिजनों को ) 'मरहम लगाओ'(Healing Touch ) नीति पर ही चलना चाह रहे हैं तो आपको विफलता ही हाथ लगेगी ;और देशभर में जिसका विरोध होगा।

■ यह सोच ही कितनी भ्रामक है कि कोई सरकार कश्मीर में मुस्लिम अलगाववादियों को तुष्ट कर के उन्हें देशप्रेमी तथा उनकी मुस्लिम साम्प्रदायिकता को धर्मनिरपेक्षता और सहिष्णुता में बदल देगी।

■ यह गुपकार गठबंधन से जुड़े सभी राजनेता कश्मीर में निर्वासित कश्मीरी हिंदुओं की वापसी नहीं चाहते हैं, ये लोग हमारी जलावतनी , हमारे जीनोसाइड, हमारी आकांक्षाओं  को अनसुना- अनकहा करने वाले लोग हैं। क्योंकि हमने कभी इनके भारत-विरोधी मन्सूबों का साथ नहीं दिया।

■ हम कश्मीर में पाकिस्तान समर्थित भारत- विरोध,जेहाद और जीनोसाइड के शिकार हैं। अनुच्छेद 370 के निरस्त किए जाने के बाद से कश्मीर की आम जनता की दृष्टि में गुपकार गठबंधन के ये सभी नेता  गये - बीते समझे जा रहे थे।आपने इन्हें लगभग जीवादान दिया है।

■इन सब नेताओं के हाथ प्रकारांतर से हमारे जीनोसाइड से रंगे हैं।हम जीनोसाइड के भुक्तभोगी (Victims of Genocide)हैं,उसके उत्तरजीवी ( Survivors)हैं।

■ आपकी इस बहुदलीय बैठक में यदि आपको या संघ- परिवार के लोगों को यह लगता है कि भाजपा वहाँ हमारा पक्ष रखेगी , जैसा कि जम्मू-कश्मीर के पूर्व उपमुख्य मंत्री आमंत्रित भाजपा नेता ने एक समाचार चैनल पर कहा भी कि वह वहाँ कश्मीरी पंडितों की समस्याओं की बात करेंगे ।

■मैं विनम्रतापूर्वक कहना चाहूँगा कि भाजपा इस बैठक में हमारी प्रवक्ता नहीं है।हम कोई मूक-बधिर लोग नहीं हैं।

■यहाँ प्रसंगवश यह भी विनम्रता से कहना चाहूँगा कि हमारे निर्वासन के आरम्भिक वर्षों में भाजपा और संघ-परिवार ने हमारी जो सहायता की और देशभर में हमारी आवाज़ उठाई , उसके प्रति तमाम कश्मीरी हिन्दु सदा कृतज्ञ हैं।
            
■ रही बात आपकी सरकार ने  05 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 और 35-ए को निरस्त कर जो ऐतिहासिक निर्णय लिया उससे आपने करोड़ों देशवासियों की संवेदनाओं का सम्मान किया।आपके इस अदम्य साहस और दृढ़संकल्प से देशभर में जो हर्षोल्लास की लहर स्पंदित हुई उसमें हम लाखों निर्वासित कश्मीरी हिन्दुओं के आह्लाद की कोई सीमा न थी।

■हमने सार्वजनिक तौर पर  विश्वभर में इस अनिवार्य व अप्रत्याशित फैसले का समर्थन किया और आज भी करते हैं।

    सादर 
डाॅ.अग्निशेखर 
संयोजक पनुन कश्मीर 
    "सुम्बल"
बी-90/12, भवानीनगर ,
जानीपुर,जम्मू-180007
 
दिनांक  : 23/ 6/ 2021

Dr. Agni Shekhar
Poet , Writer, Activist in Exile


Ankur Sharma on #APM #Genocide #Article370 #Delimitation #Panun_Kashmir #Gaza_Patti || LIVE IMAGE


What We Want | Separate Home Land | Part – 1

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