यि छै आकाशवाॅणी || कश्मीरी समाचार वाचक शम्भुनाथ भट्ट हलीम नहीं रहे || by Dr. Agni Shekhar || LIVE IMAGE

यि छै आकाशवाॅणी...

●वरिष्ठ कश्मीरी कवि,अनुवादक और अपने ज़माने के लोकप्रिय कश्मीरी समाचार वाचक शम्भुनाथ भट्ट हलीम नहीं रहे..

● विशुद्ध कश्मीरी जानने और बोलने वाले इस बुज़ुर्ग कवि ने रेडियो से समाचार वाचन के लिए अनेक नए कश्मीरी शब्द और मुहावरे गढ़े ,जो बहुत लोकप्रिय हुए।

● जैसे हवाई जहाज़ के अपहरण के लिए उन्होंने 'गिलविथ न्युन' अर्थात् उड़ा ले भागना जैसा मुहावरा प्रयोग किया।

● वर्ष 1971 में भारत-पाक युद्ध के दौरान जब भारतीय सेना ने 93,000 पाकिस्तानी फौजियों को आत्म समर्पण के लिए घेर लिया तो कवि समाचार- वादक शम्भुनाथ भट्ट ने उस घेराबंदी को
'काच़ि रटुन'(दरांति से घेरना) जैसे नये कश्मीरी मुहावरे का प्रयोग किया।

●चूँकि 'हलीम' दक्षिण कश्मीर के एक किसान-परिवार से थे,इसलिए उन्होंने देखा था कि धान ,गेंहु या खड़ी घास के गुच्छे को काटने के लिए किसान कैसे दराँति से उसे चारों ओर से काट लेता है।
इससे उन्होंने आकाशवाणी के समाचार लेखन की शब्दावली में यह कृषि-परक मुहावरा शत्रु सेना को घेरे में लिए जाने के लिए प्रयोग में लाया।

● इस तरह कश्मीर से बाहर दिल्ली में नब्बे से पूर्व दशकों से रहते हुए भी उन्होंने कश्मीरी भाषा व साहित्य को समृद्ध किया।

●आकाशवाणी दिल्ली से कश्मीरी में समाचार वाचन का उनका अंदाज़ लोकप्रिय रहा है।पहली ही पंक्ति,

"यि छै आकाशवाॅणी
व्वन्य बूज़िव तोह्य
शम्भुनाथ भट्ट 'हलीम' सिंज़
ज़्येवि खबरॅ''

●अर्थात् 'यह आकाशवाणी है।अब आप शम्भुनाथ भट्ट हलीम से समाचार सुनिए' सुनकर मन को एक वात्सल्य की अनुभूति होती थी।उनकी रेडियो आवाज़ में एक भक्ति-भाव का सहज संस्पर्श था।

●कवि शम्भुनाथ भट्ट ' हलीम' ने ललद्यद के वाखों के सीधे और सरल अनुवाद भी किए हैं जो जम्मू-कश्मीर की कला,भाषा व संस्कृति अकादमी ने पुस्तकाकार प्रकाशित किए।

●उन्होंने वर्षों तक 'कॅशुर समाचार' के हिन्दी खण्ड का संपादन किया।

●कश्मीरी साहित्य व संस्कृति को उनके अपूर्व योगदान को देखते हुए हमने वरिष्ठ कश्मीरी व हिंदी साहित्यकार रतन लाल शांत की अनुशंसा पर 'पनुन कश्मीर' की ओर से 'द्वितीय विश्व कश्मीरी पंडित सम्मेलन' के अवसर पर उन्हें दिल्ली में 'सिरी फोर्ट' सभागार में प्रतिष्ठित 'शारदा सम्मान ' से सम्मानित किया था।

●ऐसे एक प्रतीक पुरुष का जाना एक शून्य से भर देता है।नमन!

Dr. Agni Shekhar
Poet , Writer, Activist in Exile

P-2 Biography of N.T. Rama Rao हिंदी /Hindi #Political_Career | #TIRUPATI_PRODUCTION

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